चन्दनं शीतलं लोके , चन्दनादपि चन्द्रमाः।
चन्द्रचन्दनयोर्मध्ये शीतला साधुसंगतिः ।।
अर्थात:- चन्दन के लेप को सबसे शीतल माना गया है , चन्द्रमा इससे भी ज्यादा शीतलता प्रदान करता है। लेकिन सज्जनो की संगती सबसे अधिक शीतलता और शांति प्रदान करने वाली होती है ।
पण्डिते च गुणाः सर्वे मूर्खे दोषा हि केवलम्।
तस्मान्मूर्खसहस्त्रेषु प्राज्ञा एको विशिष्यते।।
अर्थात:-विद्वान व्यक्ति में गुण ही गुण होते है और मूर्ख में केवल अवगुण होते है। इसलिये संसार में हजार मूर्खो के स्थान पर एक विद्वान व्यक्ति का सम्मान होता है।
उपाध्यात् दश आचार्यः आचार्याणां शतं पिता ।
सहस्रं तु पितृन माता गौरवेण अतिरिच्यते।।
अर्थात:- एक आचार्य उपाध्याय से दस गुना श्रेष्ठ होते है । एक पिता सौ आचार्यो के समान होते है। माता, पिता से हज़ार गुना श्रेष्ठ होती है।
चन्दनं शीतलं लोके , चन्दनादपि चन्द्रमाः।
चन्द्रचन्दनयोर्मध्ये शीतला साधुसंगतिः ।।
अर्थात:- चन्दन के लेप को सबसे शीतल माना गया है , चन्द्रमा इससे भी ज्यादा शीतलता प्रदान करता है। लेकिन सज्जनो की संगती सबसे अधिक शीतलता और शांति प्रदान करने वाली होती है ।
आलस्य कुतो विद्या,अविद्यस्य कुतो धनम्।
अधनस्य कुतो मित्रम्, अमित्रस्य कुतः सुखम्।।
अर्थात:- जो आलस्य करता है। उसे विद्या प्राप्त नहीं होती है- जिसके पास विद्या नहीं होती है] उसे धन प्राप्त नहीं होता है- धन के अभाव में मित्र नहीं होते है और मित्र के अभाव में सुख प्राप्ति मुश्किल है। अतः जीवन में विद्या प्राप्त करना बहुत आवश्यक है।
आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महानं रिपुः।
नास्त्युध्यम्समो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति।।
अर्थात:- मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन आलस्य है और मनुष्य का सबसे बड़ा मित्र उसका परिश्रम है] जो कभी भी मनुष्य का साथ नहीं छोड़ता है।
संस्कृत श्लोक